पत्रकार की पहल से बदली दो अनाथ बहनों की तकदीर ।

Uttar-Pradesh

पत्रकार की पहल से बदली दो अनाथ बहनों की तकदीर ।

जाति से ऊपर उठा समाज, बिना दहेज तय हुई शादी ।सहयोग से जुटे 1.70 लाख रुपये और गृहस्थी का सामान।

By (@newspunch) July 06, 2026 241 views

कोसीकलां। कोरोना महामारी में माता-पिता समेत परिवार के कई सदस्यों को खो चुकी दो अनाथ बहनों के जीवन में अब खुशियों की नई शुरुआत होने जा रही है। यह बदलाव संभव हुआ पत्रकार एवं समाजसेवी पिंटू उपाध्याय की पहल और समाज की अभूतपूर्व एकजुटता से, जिसने जाति-पांति की सीमाएं तोड़ते हुए मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।

गांव फालैन निवासी नेहा और वर्षा ने कोरोना काल में अपने पिता रमेश चंद जाटव, माता रजनी देवी, एक भाई और दो बहनों को खो दिया था। इलाज में परिवार की पूरी जमा-पूंजी खत्म हो गई और हालात ऐसे बने कि मकान तक बेचना पड़ गया। माता-पिता के निधन के बाद दोनों बहनों की जिम्मेदारी उनके चचेरे भाई सुनील कुमार ने उठाई, जिन्होंने मजदूरी कर कठिन परिस्थितियों में उनका पालन-पोषण किया।

इसी दौरान गांव कुशक बड़ौली निवासी रोहतास ने अपने पुत्र अमन और मनजीत के साथ बिना किसी दहेज और शर्त के दोनों बहनों का रिश्ता स्वीकार कर सामाजिक समरसता की मिसाल पेश की। लेकिन विवाह की आर्थिक व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती थी। पड़ोसी अशोक कुमार ने पूरी स्थिति से कोसीकलां निवासी पत्रकार एवं समाजसेवी पिंटू उपाध्याय को अवगत कराया। उन्होंने इस मामले को केवल समाचार तक सीमित न रखते हुए समाज के जिम्मेदार लोगों, दानदाताओं और सामाजिक संगठनों से सहयोग की अपील की। अपील का असर ऐसा हुआ कि समाज के लोग जाति-पांति से ऊपर उठकर दोनों बेटियों के विवाह के लिए आगे आ गए। अब तक करीब 1.70 लाख रुपये की आर्थिक सहायता के साथ फर्नीचर, बर्तन, कपड़े और गृहस्थी का अन्य आवश्यक सामान एकत्र हो चुका है।

बुधवार, 8 जुलाई को दोनों बहनों का विवाह पूरे सम्मान, गरिमा और सामाजिक सहयोग के साथ संपन्न होगा। विवाह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पत्रकार एवं समाजसेवी पिंटू उपाध्याय ने सभी सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनशीलता, एकजुटता और मानवता की जीत है। उन्होंने कहा कि जब समाज किसी जरूरतमंद का हाथ थाम लेता है, तब उसकी सबसे बड़ी मुश्किल भी आसान हो जाती है। यह पहल एक बार फिर साबित करती है कि पत्रकारिता केवल खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जोड़कर जरूरतमंदों के जीवन में नई उम्मीद जगाने का भी सशक्त माध्यम है। दो अनाथ बेटियों के सिर पर आज जो स्नेह, सम्मान और अपनापन है, वह समाज की मानवीय संवेदनाओं की प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है।