प्लास्टिक कचरे के ढेर, खुले में आग और नियमों की धज्जियां ।
फैक्ट्री संचालक के द्वारा नियमों के विरुद्ध खुले आसमान के नीचे लगातार प्लास्टिक और कूड़ा जलाया जा रहा है । जबकि Plastic Waste Management Rules, 2016 के तहत खुले में प्लास्टिक जलाना प्रतिबंधित है। प्लास्टिक जलाने से जहरीली गैसें निकलती हैं जो वायु प्रदूषण को बढ़ाती हैं और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। इसके बाबजूद फैक्ट्री संचालक के द्वारा सभी नियमों को ताक पर रखकर लोगों के स्वास्थ के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ।
मथुरा : वार्ड नंबर 03 के अंतर्गत आने वाले गाँव नौगांव में संचालित एक प्लास्टिक एवं कबाड़ प्रसंस्करण इकाई में पर्यावरणीय नियमों के संभावित उल्लंघन की तस्वीरें सामने आई हैं। जहाँ खुले में प्लास्टिक कचरे के विशाल ढेर, अव्यवस्थित भंडारण तथा प्लास्टिक अपशिष्ट को जलाने जैसी गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। यदि यह इकाई वैधानिक मानकों का पालन नहीं कर रही है तो कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
खुले में प्लास्टिक जलाना सबसे बड़ा उलंघन ।
Plastic Waste Management Rules, 2016 के तहत खुले में प्लास्टिक जलाना प्रतिबंधित है। प्लास्टिक जलाने से जहरीली गैसें निकलती हैं जो वायु प्रदूषण को बढ़ाती हैं और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। इसके बाबजूद फैक्ट्री संचालक के द्वारा सभी नियमों को दरकिनार करते हुए लोगों के स्वास्थ के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ।
वायु प्रदूषण के नियमों के उलंघन की भी आशंका ।
यदि इकाई बिना प्रदूषण नियंत्रण उपायों के संचालन कर रही है या खुले में कचरा जला रही है तो Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981 के प्रावधानों का भी उल्लंघन माना जाता है। ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति और निगरानी अनिवार्य होती है। लेकिन प्रदूषण विभाग द्वारा इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है ।
भूजल और मिट्टी प्रदूषण को खतरा ।
खुले मैदान में प्लास्टिक एवं मिश्रित अपशिष्ट का जमावड़ा मिट्टी और भूजल प्रदूषण का कारण बन सकता है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत ऐसी गतिविधियों पर निगरानी और नियंत्रण आवश्यक है। अब देखना होगा की सम्बंधित विभागों द्वारा ऐसे फैक्ट्री संचालकों के ख़िलाफ़ क्या कार्यवाही की जायेगी ।
सबसे बड़ा सवाल क्या फैक्ट्री संचालक के पास किसी भी प्लास्टिक रीसाइक्लिंग या प्रसंस्करण इकाई के लिए सामान्यतः निम्न अनुमतियां है या नहीं ।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से Consent to Establish (CTE)
Consent to Operate (CTO)
प्लास्टिक अपशिष्ट पुनर्चक्रण (Recycler) का पंजीकरण
फैक्ट्री लाइसेंस
अग्निशमन विभाग की स्वीकृति (जहां लागू हो)
यदि फैक्ट्री संचालक के पास कोई अनुमति नहीं है या शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है तो आखिर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है । जब कानून खुले में प्लास्टिक जलाने पर रोक लगाता है, तो फिर यह आग किसकी अनुमति से जल रही है? और यदि इकाई वैध है तो पर्यावरणीय मानकों का पालन क्यों दिखाई नहीं दे रहा?